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Showing posts from June, 2025

मुझे, बस तुझे अपना बनाना था...

उस मोड़ पर छोड़ देता था साइकल अपनी, जिस मोड़ से तुझे, घर पैदल जाना था... इंतजार करता था, उन गलियों में तेरा, जहां से तेरा, रोज स्कूल आना जाना था... सोचता था, कैसे कहूं कि तुम्हें चाहता हूं, कभी तो तुझे, हाल-ए-दिल बताना था... एक महीने तक बात नहीं की तूने, इजहार-ए-इश्क पर, क्या इतना सताना था... काश तू भी करती, अपने प्यार का इजहार, मुझे तुझे, गले से लगाना था... गर तू ना भी कर देती, फिर भी तुझे ही चाहते, मुझे, बस तुझे अपना बनाना था... *हेमराज*

“मशहूर ना कर” "Mashahoor Na kar"

  करने लगे हो शायरी , सरेआम अब तो , चर्चा ईश्क का इतना , मशहूर ना कर ।   तुझे होश ही नहीं , दिन है या रात , नशे में खुद को उसके इतना , चूर ना कर।   अकेला पाते है खुद को , वो अक्सर भीड़ में , इस कदर तन्हा उसको , भरपूर ना कर।   कहां रहता है , किससे मिलता है , जरा गौर करो , खुद से उसे इतना भी , दूर ना कर ।   वो तेरी कसम झूठ ही खाने लगे हैं , चाहत में उसको इतना , मजबूर ना कर ।   वो छोड़ नहीं सकता , कहते फिरते हो सबसे , ईश्क पर अपने ईतना भी , गुरूर ना कर।   किसी दिन मांग लेगा तुझसे , आज़ादी अपनी वो , हर ख्वाहिश उसकी तू , मंजूर ना कर।     * हेम _ राज*

पापा आप याद बहुत आते है... "Papa aap yaad bahut aate hai"

  पापा आप याद बहुत आते हैं,  जब भी ये दुनिया वाले हमें सताते हैं, पापा आप याद बहुत आते हैं... आप बिना मतलब कितना करते थे सबके लिए, देखो अब लोग कितना जताते हैं  पापा आप याद बहुत आते हैं... कभी आपकी तरह समझाते ही नहीं, लोग एक गलती पर हमें कितना सुनाते हैं पापा आप याद बहुत आते हैं... हमारे एक आंसू पर, आप सारी दुनिया से लड़ जाते थे, आपके बिना ये दुनिया वाले हमें कितना रुलाते हैं, पापा आप याद बहुत आते हैं... मन ही नहीं करता बगीचे में घूमने जाने का, जब भी हम झूला बच्चों को झूलाते हैं, पापा आप याद बहुत आते हैं... कभी इसलिए भी नहीं चलाई बाइक हमने, जब भी भैया बाइक पर मौजी बच्चों को खिलाते हैं, पापा आप याद बहुत आते हैं... बच्चों संग मन करता है बच्चा हो जाऊं,  हां कभी-कभी खुद को भी, लोरी गा कर सुलाते हैं, पापा आप याद बहुत आते हैं... कैसे जीना है, कैसे जिया जाए..? जब हम बच्चों को बताते हैं, पापा आप याद बहुत आते हैं...