मुझे, बस तुझे अपना बनाना था...
उस मोड़ पर छोड़ देता था साइकल अपनी,
जिस मोड़ से तुझे, घर पैदल जाना था...
इंतजार करता था, उन गलियों में तेरा,
जहां से तेरा, रोज स्कूल आना जाना था...
सोचता था, कैसे कहूं कि तुम्हें चाहता हूं,
कभी तो तुझे, हाल-ए-दिल बताना था...
एक महीने तक बात नहीं की तूने,
इजहार-ए-इश्क पर, क्या इतना सताना था...
काश तू भी करती, अपने प्यार का इजहार,
मुझे तुझे, गले से लगाना था...
गर तू ना भी कर देती, फिर भी तुझे ही चाहते,
मुझे, बस तुझे अपना बनाना था...
*हेमराज*
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