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Showing posts from July, 2025

“भाई मेरे कैसे है..?”

  कोई पूछे जो मुझसे , भाई मेरे कैसे है ? बड़े भैया है राम जैसे , छोटे लक्ष्मण जैसे है , कोई पूछे जो मुझसे , भाई मेरे कैसे है ?   भैया करते सबका भला है , ये खूबी उनकी जैसे है , कोई पूछे जो मुझसे , भाई मेरे कैसे है ?   सब बच्चों को प्यार हैं करते , पसंद सभी को वैसे है , कोई पूछे जो मुझसे , भाई मेरे कसे है ?   दिल में उनके बस प्रेम भरा है , दया में राम जैसे है , कोई पूछ जो मुझसे , भाई मेरे कैसे है ?   छोटे थोड़ा शांत हैं रहते , त्याग में लक्ष्मण जैसे है , कोई पूछे जो मुझसे , भाई मेरे कैसे हैं ?   बच्चे उनसे दूर भागते , बड़ो को भाते वैसे है , कोई पूछे जो मुझसे , भाई मेरे कैसे है ?   बाहर से है कठोर छोड़े , अन्दर नारियल जैसे है , कोई पूछे जो मुझसे , भाई मेरे कैसे है ?   बड़े भैया है राम जैसे , छोटे लक्ष्मण जैसे है , कोई पूछे जो मुझसे , भाई मेरे कैसे है ?     * हेम _ राज*

जब मेरी बहन पहली बार मेरे ऑफिस आई...

  निमीषा , कैसा लगा भैया का ऑफिस …? मुझे सच-सच बताना तुम , अगर अच्छा लगा हो तो , एक बार फिर ऑफिस आना तुम...   जैसे भाभी ने स्टेटस लगाया था कल , वैसे ही WhatsApp डीपी लगाना तुम , एक बार फिर ऑफिस आना तुम...   बहुत कुछ करना है तुम्हारे लिए , जो ना कर पाऊँ , वो बताना तुम , एक बार फिर ऑफिस आना तुम...   कल और आज , किसी और के साथ खाया खाना तुमने , इक रोज़ मेरे साथ भी खाना तुम , एक बार फिर ऑफिस आना तुम...   बहुत अच्छा लगा , मुझे रिवर फ्रंट कल , इसी तरह मुझे किसी और जगह भी घूमना तुम , एक बार फिर ऑफिस आना तुम...   कल तो अकेले ही आए थे , कभी , अपनी भाभी को भी साथ में लाना तुम , एक बार फिर ऑफिस आना तुम...   जैसे कल हंस रहे थे बेवजह , जिंदगी भर, यूं ही मुस्कुराना तुम , एक बार फिर ऑफिस आना तुम...   बहुत मिस करता हूँ तुमको , ये बात और किसी को ना बताना तुम , निमीषा , एक बार फिर ऑफिस आना तुम...     * हेम _ राज*  

“अब हम पापा को थोड़ा कम ही भाते हैं…”

  मेरी बिटिया रानी , शायद मुझसे कुछ कहना चाहती है...   अब हम पापा को थोड़ा कम ही भाते हैं , आजकल वो अपना सारा प्यार "अभी" पर ही लुटाते हैं... अब हम पापा को थोड़ा कम ही भाते हैं …   चाहे सुबह हो या शाम , हर वक्त "अभी" के साथ ही नज़र आते , अब हम पापा को थोड़ा कम ही भाते हैं …   जो मस्ती मेरे साथ करते थे कभी , आजकल "अभी" के साथ दोहराते है , अब हम पापा को थोड़ा कम ही भाते हैं …   पहले मुझे ढेरों कहानी सुनाते थे , अब तो बहुत कम ही बतलाते हैं , अब हम पापा को थोड़ा कम ही भाते हैं …   मेरी हर नादानी पर मुस्कुराते थे , अब मुझे बड़ों की तरह समझाते हैं , अब हम पापा को थोड़ा कम ही भाते हैं …   उन संग खेलने को , उनकी लोरी सुनने को , अब हम तरस जाते हैं ,   अब हम पापा को थोड़ा कम ही भाते हैं …        * हेम _ राज*