ये इश्क़ नहीं आसान... (Yeh Ishq Nahi Aasan...)
हम करते थे उन्हें प्यार बेशुमार , और कोई काम ना बचा था जमाने में.. . वो पढ़ती थी मेरी क्लास में ही , फिर भी कुछ बरस लग गए उसे ये बताने में.. . वो टहल रही थी एक रात छत पर , तारो ने कोई कमी न कि नूर बरसाने में.. . एक रोज़ जब किया इजहारे इश्क़ उनसे , वो भी लगें थे प्यार में नखरे दिखाने में.. . जाने लगा था छोड़ के मैं दुनिया दारी , उसने भी तो बड़ी देर कर दी थी आने में… डाकिया बना के दोस्त को भेजा था उसने , बड़ी मुश्किल पेश आई उसे हमें समझाने में.. . करके हिम्मत वो आये हमें खुद ये बताने , हो जायेंगे बदनाम दोनो , इश्क़ से जमाने में.. . डर डर के वो मुझसे मिलने आते थे , बड़ी मुश्किले आई उसे इश्क़ को छुपाने में... जब मनाने में लगे हम घरवालो को , रिश्तेदारों ने कोई कमी न छोड़ी थी आग लगाने में... ये तो हम दोनों जानते है , कैसे रहे एक दूजे के बिना , हर मुमकिन कोशिश की दोनों ने, इस रिश्ते को बचाने में... *हेम_राज*