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सरकारी नौकरी... (Sarkari Naukari...)

  कोई गांव छोड़ कर आया है , कोई शहर अपना , पूरा करने को, अपने मां-बाबा का सपना...   घर से कमाने दूर , जब हम दूसरे शहर जाते हैं , साल गुजरने लगते है , हम वही ठहर जाते है...   याद सताती हैं घर की , हर रोज अकेले में , ना चाहते हुए भी पी , जुदाई का जहर जाते है...   लोग कहते है , सरकारी नौकरी है , मजे है , आगे आसान सफर है तुम्हारा , कोई हमसे पूछे , कैसे हम रोज़ , उस डगर जाते है...   ये आंखें , ये आंसुओं के बादल है , याद करके घर अपना , अक्सर बरस जाते है..   खाने को मां के हाथ का खाना , हम सरकारी नौकरी वाले , हर रोज तरस जाते है...   दो रोटी नसीब हो , सबको मेरे घर में , हम भी कमाने रु , किसी शहर जाते है..!!     * हेम _ राज*