न जाने किस से डरते हैं...
अब कहां वो हमसे बात करते हैं , नजरें भी नहीं मिलाते , जब मुलाकात करते हैं... धीरे-धीरे पास जाकर , हम ही कुछ करने की शुरुआत करते हैं... न जाने किसका है डर उनको , न जाने किस से डरते हैं... जरा सा छूं भी लूं उसे , तो यूं लंबी-लंबी आहें भरते हैं... जो लगा लूं गले से उसको , तो बाहों में मेरी , बर्फ की तरह पिघलते हैं... बिना उसके , एक पल भी कटता है सदियों सा , साथ में उसके , दिन भी मिनटों में ढलते हैं... * हेम _ राज*