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दो सूरज तो झुमके बनाकर, उसने कान में पहने हैं... (Do Suraj to jhumke banakar, usne kaan me pahne hai...)

  ये चांद , सितारे और नक्षत्र सारे , मानो उसके गहने हैं... दो सूरज तो झुमके बनाकर , उसने कान में पहने हैं...   नाक की नथनी उल्कापिंड सी , टीके में   सितारे रहने है , दो सूरज तो झुमके बनाकर , उसने कान में पहने हैं...   बिछिया और पायल धूमकेतु से , आकाशगंगा में बहने है ,   दो सूरज तो झुमके बनाकर , उसने कान में पहने हैं..    बिंदी उसकी चांद समझ लो , आंखों के क्या कहने हैं , दो सूरज तो झुमके बनाकर , उसने कान में पहने हैं...     * हेम _ राज*