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Showing posts from January, 2025

आज फिर ख्वाब में आना तुम... (Aaj fir Khwab me ana tum...)

  मुझे अपनी याद दिलाना तुम , आज फिर ख्वाब में आना तुम...   मैं सोने लगूं , तो न नींद से मुझे जगाना तुम , आज फिर ख्वाब में आना तुम...   क्या-क्या किया दिनभर , साथ बैठकर मुझे बताना तुम , आज फिर ख्वाब में आना तुम...   सपने में भी हो जाऊं नाराज , तो प्यार से मुझे मनाना तुम , आज फिर ख्वाब में आना तुम...   कल जो रह गई थी बातें अधूरी ख्वाब में , उसके आगे मुझे बताना तुम , आज फिर ख्वाब में आना तुम...     * हेम _ राज*

जब सरे आम रंग ही अपना दिखाना था... (Jab sare aam rang hi apna dikhana tha...)

  जब सरे आम रंग ही अपना दिखाना था , तो इस तरह साथ भी मेरे क्यों आना था...   क्यों लग गया तू भी जमाने के साथ, सताने मुझे , एक तू ही तो था , जिसे मुझे बचाना था...   जब गिनाने लगे थे सभी ऐब मेरे , तुझे मेरी अच्छाई का, कोई किस्सा सुनना था...   तूने तो एक पल में कर दिया, मुझे घर से बेघर , उस वक्त तो तुझे, मुझे सीने से लगाना था...   हां उस शख्स ने भी, छोड़ा मुझे जमाने के लिए , जिसके लिए हर बार, मैंने छोड़ा जमाना था...     * हेम _ राज*