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Showing posts from March, 2025

मैं थाकी गणगौर... (Main Thaaki Gangaur...)

  मैं हूं बादली शांत सी , थे बरसो घनघोर। थे हो साजन ईसर म्हारा , मैं थाकी गणगौर।।   म्हाने लागे कोयल प्यारी , थाने भावे मोर , थे हो साजन ईसर म्हारा , मैं थाकी गणगौर।।   मैं तो बैठू शांत सी , थाने चाहिजे शोर , थे हो साजन ईसर म्हारा , मैं थाकी गणगौर।।   मैं हूं भोली भाली छोरी , थे शाणा चितचोर , थे हो साजन ईसर म्हारा , मैं थाकी गणगौर।।      *हेम_राज*  

"तू" से "आप" तक का सफर... ("Tu" se "Aap" tak ka safar...)

  उसको पाने के लिए, ना जाने कौन-कौन से जाप हुए थे, तब जाकर हम उसके लिए, "तू" से "तुम"... "तुम" से "आप" हुए थे...       *हेम_राज*

चलो तुम रूठो, मैं तुम्हे मनाऊं... (Chalo tum rutho, mein tumhe manayun...)

कोई शेर लिखूं, गजल पढूं, या कोई शायरी  तुम्हे  सुनाऊं... चलो तुम रूठो, मैं तुम्हे मनाऊं... तुझे फोन करूँ, विडियो कॉल करूँ, या तेरी फ़ोटो से ही बतलाऊं... चलो तुम रूठो, मैं तुम्हे मनाऊं... कोई तोहफ़ा ख़रीदूँ, गुलाब भेजू , या खुद सामने आ जाऊँ... चलो तुम रूठो, मैं तुम्हे मनाऊं... तुझे गले लगाऊँ, गौद में उठालूँ, या ख़ुद तुझमे खों जाऊँ.... चलो तुम रूठो, मैं तुम्हे मनाऊं...     *हेम_राज*