“हमारे अफसाने” "Humare Afsane"

 

हमारे अफसाने, हमारे बाद,

बेशक मिलेगे, तुम्हें इन जहांनों में मिलेंगे।

 

कुछ मिलेंगे तुम्हे, अपनों में,

कुछ गैरो में, अनजानों में मिलेंगे ।

 

कुछ फूल मिलेंगे कॉपी में उसकी,

कुछ फूल तुम्हे, फूलदानों में मिलेंगे।

 

कुछ झुमके, बाली घर में रखे हैं,

उसकी पसन्द के, उसके कानों में मिलेंगे।

 

कुछ तोह‌फे मिलेंगे घर में उसके,

जो ना ले पाए, वो दुकानों में मिलेंगे।

 

जो कबुतर उड़ाये थे उसके घर को,

वो उड़ते हुए, आसमानों में मिलेंगे।

 

जहां कभी मिलते थे, बैठते थे,

हमारे निशां, तुम्हे उन बागानों में मिलेंगे।

 

मेरे शैर और शायरी कहां ढूंढोगे,

मेरे बाद तुम्हें, ये मेरे गानों में मिलेंगे।

 

हमारे अफसाने, ह‌मारे बाद,

बेशक मिलेंगे, तुम्हें इन जहांनों में मिलेंगे।

 

*हेम_राज*

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