जब सरे आम रंग ही अपना दिखाना था... (Jab sare aam rang hi apna dikhana tha...)

 

जब सरे आम रंग ही अपना दिखाना था,

तो इस तरह साथ भी मेरे क्यों आना था...

 

क्यों लग गया तू भी जमाने के साथ, सताने मुझे,

एक तू ही तो था, जिसे मुझे बचाना था...

 

जब गिनाने लगे थे सभी ऐब मेरे,

तुझे मेरी अच्छाई का, कोई किस्सा सुनना था...

 

तूने तो एक पल में कर दिया, मुझे घर से बेघर,

उस वक्त तो तुझे, मुझे सीने से लगाना था...

 

हां उस शख्स ने भी, छोड़ा मुझे जमाने के लिए,

जिसके लिए हर बार, मैंने छोड़ा जमाना था...

 

 

*हेम_राज*

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