कल वो फिर ख्वाब में आई थी... (Kal wo fir Khwab me aayi thi...)
मुझे रुठे हुए को मनाने को,
फलसफे अपने सुनाने को,
कल वो फिर ख्वाब में आई थी...
प्यार अपना जताने को,
वो मरती हैं मुझ पर बताने को,
कल वो फिर ख्वाब में आई थी...
मुझे सोए हुए को उठाने को,
मुझे नींद से अपनी जगाने को,
कल वो फिर ख्वाब में आई थी...
उदासी को मेरी मिटाने को,
मुझे बिन बात ही हंसाने को,
कल वो फिर ख्वाब में आई थी...
*हेम_राज*
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