इश्क़ की खुमारी... (Ishq ki khumari...)

 

जब भी नज़र मिलती थी उससे, वो मेरी आंखें पढ़ रही थी,

कुछ इस कदर इश्क़ की खुमारी, दोनों पर चढ़ रही थी...

 

धीरे–धीरे सारी क्लास, हमारी मोहब्बत के किस्से गढ़ रही थी,

कुछ इस कदर इश्क़ की खुमारी, दोनों पर चढ़ रही थी...

 

जब आया बिछड़ने का वक्त, दूरियां दोनों के दरमियां बढ़ रही थी,

कुछ इस कदर इश्क़ की खुमारी, दोनों पर चढ़ रही थी...

 

हमने तो मान ली थी हार, पर वो जमाने से लड़ रही थी,

कुछ इस कदर इश्क़ की खुमारी, दोनों पर चढ़ रही थी...


 

 
*हेम_राज*

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